जानिए क्या है CAA किसको दी जाएगी नागरिकता। इस कानून से नहीं छिनेगी किसी की नागरिकता

नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के नाम पर भारत में पिछले 2 हफ्तों से प्रदर्शन हो रहे हैं जो बाद में हिंसा का रूप ले लेते हैं। लेकिन इन सबके बीच हमें ये भी समझना चाहिए कि वास्‍तव में नया कानून क्‍या है? क्‍या अफवाहें फैलाई जा रही हैं? इसके बारे में लोग क्या सोचते हैं ।
दरअसल CAA नागरिकता संशोधन कानून है। जिसे सिर्फ और सिर्फ अवैध रूप से घुसपेठ करने वाले घुसपैठहीयों और शरणार्थहीयों के लिए लाया गया है । इसका किसी भी धर्म के किसी भारतीय से कोई लेना देना नहीं है । और NRC का मतलब है एक ऐसा राष्ट्रीय रजिस्टर जिसमें देश के सभी नागरिकों की पूरी जानकारी होगी । जिसको अभी तक ना तो लागू किया गया है और ना ही इसके बारे में कोई दिशा निर्देश तय किए गए हें । फिलहाल NRC सिर्फ आसाम में लागू है जिसको देश के सार्वोच्च न्यायालय ने वहाँ की पारिस्थितिओ के अनुरूप बहुत पहले लागू किया था। एसलिए
NRC से फिलहाल घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है क्युकी जब NRC पूरे देश मे लागू होगा तो उसको देश के सभी लोगों को ध्यान मे रखकर उनके अनुरूप लागू किया जाएगा।

( Citizenship Amendment Act )अब बात करते हें CAA की जिसे हम सवाल जवाब के माध्यम से समझने की कोशिश करेंगे।

1 – क्या इससे भारत का कोई मौजूदा नागरिक प्रभावित होगा?
जवाब- बिल्कुल नहीं. CAA किसी वर्तमान भारतीय नागरिक के मूलभूत अधिकारों को नुकसान नहीं पहुंचाता है. इसमें सभी धर्मों के नागरिक शामिल हैं

2 – ये कानून किन पर लागू होता है.
जवाब- ये कानून सिर्फ उन हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और पारसियों पर लागू होता है जो 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए थे और जिनके पलायन की वजह धर्म के आधार पर होने वाला शोषण था. लेकिन ये कानून इन 3 देशों से भारत में आए मुस्लिमों पर लागू नहीं होता क्युकी वहां पर ये अल्पसंख्यक नहीं हैं और ना ही इनके पलायन की वजह धर्म के आधार पर होने वाला शोषण होगा । इसके बावजूद अगर इन 3 देशों से कोई मुस्लिम नागरिकता चाहता है तो उसके लिए एक अलग प्रक्रिया है जिसके द्वारा पहले भी बहुत लोगों को नागरिकता दी जा चुकी है और आगे भी दी जाती रहेगी उस प्रक्रिया मे कोई फेरबदल नाहों किया गया है

3 – इस कानून से तीन पड़ोसी देशों से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और पारसियों को क्या फायदा होगा
जवाब- पासपोर्ट और वीज़ा जैसे दस्तावेज़ ना होने के बावजूद…उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी.

4 – क्या पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए मुसलमान कभी भारत के नागरिक नहीं बन सकते?
जवाब- भारत के नागरिकता कानून की धारा 6 के नियमों का पालन करके कोई भी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है. मौजूदा कानूनों के आधार पर पिछले कुछ वर्षों में कई विदेशी मुसलमानों को भारत की नागरिकता दी गई है. भविष्य में भी ये व्यवस्था कायम रहेगी. यानी अगर कोई मुसलमान किसी भी देश से भारत आता है और भारत का नागरिक बनना चाहता है तो उसे सिर्फ कुछ नियम कायदों का पालन करना होगा और सभी दस्तावेज़ सही पाए जाने पर उसे भारत की नागरिकता मिल जाएगी

5 – क्या नए नागरिकता कानून के लागू हो जाने के बाद अवैध रूप से भारत आए मुसलमानों को वापस भेज दिया जाएगा..
जवाब- नहीं. क्योंकि इस नए कानून में अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का प्रावधान नहीं है. इन लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया पहले से मौजूद कानूनों के तहत पूरी की जाएगी
और सबसे बड़ी बात ये है कि सिर्फ पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदुओं को ही नए कानून के तहत नागरिकता दी जाएगी. अगर किसी और देश का हिंदू भारत आकर नागरिकता मांगता है तो उसे इस नए कानून से कोई फायदा नहीं होगा

भ्रम और अफवाह


एक अफवाह ये भी फैलाई जा रही है कि इस नए कानून के तहत भारतीय मुसलमानों से उनकी नागरिकता छीन ली जाएगी. लेकिन ये सरासर झूठ है क्योंकि CAA किसी भारतीय नागरिक पर लागू नहीं होता है.
कुछ लोग ये भ्रम भी फैला रहे हैं कि नागरिकता कानून के बाद पूरे देश में NRC लागू कर दिया जाएगा. मुसलमानों को छोड़कर सभी शरणार्थियों को भारत का नागरिक बना दिया जाएगा और मुसलमानों को डिटेंशन कैंपों में भेज दिया जाएगा. लेकिन ये भी कोरा झूठ है…क्योंकि नागरिकता कानून का NRC से कुछ लेना देना नहीं है. NRC से जुड़े कानूनी प्रावधान 2004 से ही नागरिकता कानून 1955 का हिस्सा हैं और CAA की वजह से इनमें कोई बदलाव नहीं हुआ है

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